Thursday, 19 September 2019

दिव्यमाला अंक 29

गतांक से आगे......
दिव्य कृष्ण लीला ....अंक 29
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    बकासुर प्रकरण ******************************
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श्रीकृष्ण ने देखा उसको ,और तुरत ही भांप लिया।
गए पास में उस दानव के ,पल में उसको नाप लिया।
चौन्च खोलकर दानव ने भी , कृष्ण को मुंह मे ढांप लिया।
श्री कृष्ण ने भीतर घुसकर,मारा दानव कांप गया।
छोड़े बाहर कृष्ण कन्हाई,होकर परेशान...
हे पूर्ण कला के अवतारी तेरा यशगान ....कहाँ सम्भव? 57
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बाहर आकर चौन्च पकड़कर , चीर दिया दो भागों में।
आंखे बाहर निकली उसकी ,बदला तुरत विभागों में।
गोप ग्वाल सब ताली देते,गान लगे खुश रागों में।
बकासुर तो उतरा पार पर ,कंस हुआ अभागो में।
बार बार बस होता रहता ,बस परेशान... कहाँ सम्भव।
हे पूर्ण कला के अवतारी.....तेरा यशगान कहाँ सम्भव?    58
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क्रमशः अगले अंक में
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*कलम घिसाई*
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9414764891

Saturday, 3 November 2018

ख्वाब

सपना  यानि उर्दू में  *ख्वाब* अंग्रेजी में *ड्रीम* पर एक ग़ज़ल की शक्ल में कलम घिसाई




विषय- ★ख्वाब★, *सपना*, (dream)
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बहर ए रमल मुसद्दस मख़बून मुसककन
वज़्न --2122 1122 22(112)
 (फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन)
अर्कान-- फ़ाइलातुन--फ़इलातुन--फ़ैलुन(फ़इलुन)
क़ाफ़िया—आ स्वर
रदीफ़ ---करते हैं।
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*हुस्ने मतला* 17
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ख्वाब मस्जिद  में दुआ करते है।
ख्वाब दिल को भी छुआ करते है।1
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ख्वाब नींदों में चला करते है।
ख्वाब अपनों से गिला करते है।2
★
ख्वाब पानी में मिला करते है।
ख्वाब ओठो पे सिला करते है। 3
★
ख्वाब जब दिल में सजा करते है।
ख्वाब  फिर सबसे वफ़ा करते है।4
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ख्वाब बिन पंख उड़ा करते है।
ख्वाब बिस्तर पे सड़ा करते है।5
★
ख्वाब रूठे तो  सजा करते है।
ख्वाब टूटे तो दगा करते है। 6
★
ख्वाब लम्हो को जिया करते है।
ख्वाब जख्मो को सिया करते है। 7
★
ख्वाब दिल की भी दवा करते है।
ख्वाब गर्मी में हवा करते है।। 8
★
ख्वाब मुझको तो रवां करते है।
ख्वाब सबको जवां करते है। 9
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ख्वाब में सब ही डरा करते है।
ख्वाब जख्मो को हरा करते है। 10
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ख्वाब असली में खुदा करते है।
ख्वाब इंसा को जुदा करते है। 11
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ख्वाब  कैसे भी मरा करते है।
ख्वाब देखो न बुरा करते है। 12
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ख्वाब गैरो से जुड़ा करते है।
ख्वाब आहट से मुड़ा करते है। 13
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ख्वाब कलमें भी घिसा करते है।
ख्वाब अक्सर ही पिसा करते है। 14
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ख्वाब रातों को जवां करते है।
ख्वाब नींदों को तबाह करते है। 15
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ख्वाब फूलों को घना करते है।
ख्वाब  किसको न फ़ना करते है। 16
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ख्वाब तो सब ही बुना करते है।
ख्वाब पूरे भी हुआ करते है। 17
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★9*अश'आर*★
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ख्वाब की कोई जमीं नहि होती।
ख्वाब फिर भी उगा करते है। 18
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ख्वाब तो ख्वाब है आते सबको।
ख्वाब पूरे हो दुआ करते है। 19
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ख्वाब आना ओ चले जाना भी,
ख्वाब का क्या है मिटा करते है। 20
★
ख्वाब देखे यह  सूनी  अँखियाँ।
ख्वाब आँखों में पला करते है। 21
★
ख्वाब आते है मुझे तेरे ही।
ख्वाब तुझमे ही रमा करते है। 22
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ख्वाब से  बाहर  निकलूं कैसे।
ख्वाब मुझको पकड़ा करते है।23
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ख्वाब में देख लिया  जब तुमको।
ख्वाब ज्यादा ही उठा करते है।24
★
ख्वाब मुझको तो जगाते है।
ख्वाब आँसू में ढला करते है। 25
★
ख्वाब आखिर क्या नही करते।
ख्वाब सब कुछ ही किया करते है। 26

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★5*मक़्ता*★
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 ख्वाब 'मधु'रस को पिया करते है।
 ख्वाब सब रस में जिया करते है।  27
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 ख्वाब 'मधु' अब मत देखो इतना।
 ख्वाब जीवन भी लिया करते है। 28
★
ख्वाब की उम्र नही 'मधु' वैसे  ।
ख्वाब मौसम में खिला करते है।  29
★
ख्वाब 'मधु'देखो गुमाँ करते है।
ख्वाब सूखे तो धुँआ करते है। 30

ख्वाब तुम्हे है कसम ख्वाबो की।
ख्वाब 'मधु'दिल में समाँ करते है। 31



नोट -- आप इसमें *ख्वाब की जगह प्रत्येक स्थान पर *स्वप्न* प्रयोग कर सकते है।
  *कलम घिसाई*